उदयपुर के पारस हॉस्पिटल में 90 वर्षीय बुजुर्ग का सफल रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण; सर्जरी के मात्र एक महीने बाद चौकड़ी मारकर बैठने में हुए सक्षम

उदयपुर:

चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक तकनीक के बेजोड़ तालमेल ने एक बार फिर एक मरीज को नया जीवन दिया है। छोटीसादड़ी (चित्तौड़गढ़) के रहने वाले 90 वर्षीय बुजुर्ग भुरा लाल तेली, जो पिछले 25 वर्षों से दोनों घुटनों के असहनीय दर्द से पीड़ित थे, अब पूरी तरह स्वस्थ और गतिशील हो चुके हैं। उदयपुर के पारस हॉस्पिटल के सीनियर ऑर्थोपेडिक और रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. आशीष सिंघल ने रोबोटिक तकनीक के जरिए मरीज के दोनों घुटनों का सफल रिप्लेसमेंट (Robotic Knee Replacement) किया है।
25 साल पुराना दर्द, एक महीने में खत्म
मरीज भुरा लाल तेली पिछले ढाई दशकों से घुटनों के गंभीर दर्द के कारण चलने-फिरने और अपनी दैनिक गतिविधियों के लिए दूसरों पर निर्भर थे। बढ़ती उम्र (90 वर्ष) के कारण पारंपरिक सर्जरी में जोखिम अधिक था, लेकिन डॉ. आशीष सिंघल और उनकी टीम ने आधुनिक रोबोटिक असिस्टेड तकनीक का उपयोग करके इस चुनौती को स्वीकार किया।
रोबोटिक सर्जरी की सटीकता और एडवांस केयर का ही परिणाम है कि मरीज ने न सिर्फ तेजी से रिकवरी की, बल्कि सर्जरी के मात्र एक महीने के भीतर वे पालथी (चौकड़ी) मारकर बैठने में भी पूरी तरह सक्षम हो गए हैं। इस अभूतपूर्व रिकवरी से मरीज और उनका परिवार बेहद खुश है।
क्या कहा डॉक्टर ने
वरिष्ठ सर्जन डॉ. आशीष सिंघल ने बताया, "90 वर्ष की आयु में दोनों घुटनों का एक साथ रिप्लेसमेंट करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन रोबोटिक तकनीक की मदद से हम 100% सटीकता के साथ इस सर्जरी को अंजाम दे पाए। इस तकनीक में खून का बहाव बहुत कम होता है, हड्डियां सुरक्षित रहती हैं और मरीज को दर्द भी न के बराबर होता है। यही कारण है कि भुरा लाल जी इतनी जल्दी अपने पैरों पर खड़े हो सके और बिना किसी सहारे के चौकड़ी मारकर बैठ पा रहे हैं।"
पारस हॉस्पिटल उदयपुर अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के साथ क्षेत्र के मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए निरंतर संकल्पित है।


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